Yoga

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Yoga Study Materials

Complementary-Medicine
This Notes contains Complementary-Medicine:- Pyramid therapies, Swadhyay therapy, Sun- Ray therapy, Acupressure Therapy, Acupuncture therapy, Magnet therapy, Yagnatherapy
Yoga
This Notes contains Introduction to Yoga, Meaning of yoga,Definition and Purpose of yoga, Importance and history of yoga. This Notes also contains types of yoga( Gyan yoga, Karma yoga ,Bhakti yoga Ashtanga yoga. In the end this Notes contains the deep science of God, soul and Nature.
मनो रोगों की वैकल्पिक चिकित्सा
मनो रोगों की वैकल्पिक चिकित्सा। इस नोट्स के अंतर्गत असामान्य मनोविज्ञान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, असामान्य व्यवहार का कारण व निदान, तनाव का अर्थ-लक्षण-कारण और प्रबंधन, दुर्भीति का अर्थ- लक्षण- कारण-प्रकार एवं उपचार आदि के बारे में बताया गया है। इस नोट्स में मुख्य रूप से विषाद, अवसाद, व्यक्तित्व विकृति, मानसिक दुर्बलता आदि के कारण व उपचार आदि के बारे में बताया गया है।
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इस नोट्स के अन्तर्गत योगकुंडल्युपनिषद् , योग तत्वोपनिषद्, योगराज उपनिषद्, ध्यान बिंदुपनिषद्, नादबिंदूपनिषद्, योग चूड़ामणि उपनिषद, श्वेताश्तरोपनिषद्, ईशावास्योपनिषद, ऐतरेयोपनिषद, कठोपनिषद, केनोपनिषद, छान्दोग्योपनिषद्, ‌त्रिशिखीब्रह्मणोपनिषद् को बहुत ही गहराई से वर्णित किया गया है।
इस नोट्स के अंतर्गत पंचमहाभूत तत्व (जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु, आकाश) का अर्थ, परिभाषा एवं महत्व का विस्तारपूर्वक वर्णन है। पंचमहाभूत चिकित्सा जैसे जल चिकित्सा में प्रयुक्त विविध पट्टियाँ एवं सेक, कटि स्नान, सर्वांग गीली चादर की पट्टी, मिट्टी चिकित्सा आदि का सरल भाषा में वर्णन है। पंचप्राण की अवधारणा, प्राणायाम का महत्व, उपवास का महत्व-प्रकार आदि का भी वर्णन इस नोट्स में है।
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इस नोट्स के अंतर्गत महर्षि पतंजलि ने योग के मूल रूप को समझाया है, चित्त की वृत्तियां व उसके निरोध के उपाय, क्रिया योग, अष्टांग योग, समाधि, संयम जनित विभूतियों के आधार पर आज विभूतियों का वर्णन इस नोट्स में किया है,, साथ में महर्षि पतंजलि द्वारा पंच क्लेश, चित् विक्षेप और योग अंतरायों से मुक्ति का उपाय भी बताया गया है।
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इस नोट्स के अंतर्गत महर्षि पतंजलि कृत पातंजल योगदर्शन का वर्णन किया गया है,, जिसमें 195 सूत्र है जो कि चार अध्यायों (पाद) में वर्णित है। इस नोटस् में मुख्यतः चित्त वृत्तियां कौन-कौन सी हैं,, चित्त वृत्तियों को रोकने के उपाय, चित्त भूमियां, चित्त प्रसादम के उपाय, क्रिया योग, अष्टांग योग, अष्टांग योग का परिणाम, समाधि संयम, संयम जनित विभूतियां आदि का वर्णन किया गया है। इस नोट्स में ईश्वर, पुरुष, प्रकृति व कैवल्य के स्वरूप का वर्णन भी किया गया है, अंत में चित्त विक्षेप, योग अंतराय व पंच क्लेशों का वर्णन किया गया है।
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इस नोट्स के अंतर्गत आधुनिक चिकित्सा के साथ दी जाने वाली पारंपरिक चिकित्सा की जानकारी दी गई है जिसे पूरक चिकित्सा कहते हैं,, इस नोट्स में एक्यूप्रेशर का इतिहास, एक्यूप्रेशर के सिद्धांत, एक्यूप्रेशर की विधि, एक्यूप्रेशर के उपकरणों द्वारा उपचार एवं एक्यूप्रेशर के लाभ व सावधानियों का वर्णन किया गया है। एक्यूप्रेशर के पश्चात एक्यूपंचर का अर्थ, सिद्धांत एवं विधियों के बारे में बताया गया है, एक्यूपंचर से होने वाले लाभ, एक्यूपंचर से विभिन्न रोगों की चिकित्सा, सावधानियां व सीमाओं का वर्णन भी किया गया है।
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इस नोट्स के अंतर्गत प्राकृतिक चिकित्सा का अर्थ, परिभाषा, प्राकृतिक चिकित्सा के मूलभूत सिद्धांतों के द्वारा प्राकृतिक चिकित्सा के रहस्य को उजागर किया गया है। प्राकृतिक चिकित्सा मुख्यतः पंचमहाभूतों पर निर्भर होती है, इस नोट्स के अंतर्गत पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश आदि तत्वों की परिभाषा व पंचतत्व चिकित्सा का वर्णन किया गया है। इस नोट्स के अंतर्गत स्वास्थ्य को परिभाषित करते हुए रोग की अवधारणा, रोग का कारण, रोग को पहचानने के लिए निदान की विधियों का वर्णन किया गया है व पंचतत्व द्वारा रोगों की चिकित्सा कैसे संभव ,है यह बताया गया है।
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इस नोट्स के द्वारा प्राकृतिक चिकित्सा को गहराई से समझें। इस नोट्स के अंतर्गत प्राकृतिक चिकित्सा का अर्थ, परिभाषा, प्राकृतिक चिकित्सा के मूलभूत सिद्धांतों के द्वारा प्राकृतिक चिकित्सा के रहस्य को उजागर किया गया है। प्राकृतिक चिकित्सा मुख्यतः पंचमहाभूतों पर निर्भर होती है, इस नोट्स के अंतर्गत पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश आदि तत्वों की परिभाषा व पंचतत्व चिकित्सा का वर्णन किया गया है।
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इस नोट्स के अंतर्गत गीता में वर्णित आत्मस्वरूप, स्थितप्रज्ञ दर्शन, सांख्ययोग, कर्मयोग, सन्यास योग, ध्यान योग, भक्ति योग आदि के बारे में विस्तार से बताया गया है। अंत में प्रकृति के तीन गुण, दैवीय व आसुरी संपदा, श्रद्धात्रय विभाग योग, भोजन के प्रकार, योग की परंपरा, परा व अपरा प्रकृति, नरक के तीन द्वार, तीन प्रकार के त्याग, कर्म के कारण व प्रेरणा आदि का वर्णन किया गया है।
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इस नोटस् के अंतर्गत मानव चेतना एवं भारतीय दर्शनों का वर्णन किया गया है,, इस नोट्स में वेदों, उपनिषदों, षड्दर्शनों आदि में चेतना के स्वरूप का वर्णन किया गया है, इसके साथ में विभिन्न धर्मों में चेतना का स्वरूप क्या है,इसका वर्णन किया गया है, संस्कार पुनर्जन्म, भाग्य और पुरुषार्थ की भी सरल व्याख्या की गई है। इस नोट्स में दर्शन का अर्थ, भारतीय दर्शन जो कि मुख्यतः नौ है, जिसमें से छह आस्तिक और तीन नास्तिक है, उन सभी दर्शनों का यहां वर्णन किया गया है। जिसमे न्याय दर्शन, वैशेषिक दर्शन, सांख्य दर्शन, योगदर्शन, पूर्व मीमांसा एवं वेदांत दर्शन जो कि सभी आस्तिक दर्शन है।
यह नोट्स मानव शरीर की रचना व क्रिया विज्ञान पर आधारित है। इस नोट्स में शरीर के प्रमुख 11 तंत्रों के बारे में बताया गया है। यह नोट्स नेट-जेआरएफ की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिसमें त्वचा संस्थान, अस्थि संस्थान पेशीय संस्थान, तंत्रिका तंत्र, ज्ञानेंद्रियां अंतः स्त्रावी संस्थान, रक्त परिसंचरण संस्थान, हृदय, श्वसन संस्थान, पाचक संस्थान, पोषण एवं चयापचय,मूत्रीय संस्थान आदि का वर्णन किया गया है।
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इस नोट्स के अंतर्गत मानव शरीर के प्रमुख ग्यारह संस्थानों के बारे में बताया गया है जिसमें मुख्य रूप से रक्त परिसंचरण तंत्र, हृदय की संरचना व क्रिया, पाचन तंत्र की संरचना व क्रिया, श्वसन तंत्र, मस्तिष्क, मेरुरज्जु की संरचना व कार्य आदि के साथ-साथ अंत स्त्रावी ग्रंथियों को विस्तारपूर्वक समझाया गया है।
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इस नोट्स के अंतर्गत उपनिषद् का अर्थ, ईशावास्योपनिषद्, केनोपनिषद, कठोपनिषद्, प्रश्नोपनिषद, मंडूक उपनिषद्, मांडुक्य उपनिषद्, ऐतरेय उपनिषद्, तैत्तिरीय उपनिषद्, छांदोग्य उपनिषद्, बृहदारण्यक उपनिषद, योग वशिष्ठ, आदि और व्याधि को अति सरलता से समझाया गया है। नेट जेआरएफ की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए अति उपयोगी है।
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इस नोट्स के अंतर्गत योग की अवधारणा-महत्व,योग एवं आयुर्वेद का उद्देश्य-संबंध, अष्टांग योग-अष्टांग आयुर्वेद को संबंधित करके दर्शाया गया है,शरीर की शुद्धि के लिए यौगिक षट्कर्म व आयुर्वेदोक्त पंचकर्म के बारे में भी बताया गया है। अंत में सद्वृत्त एवं अचार-रसायन, आहार, दिनचर्या, रात्रिचर्या, आयुर्वेदोक्त आहार-विहार, ऋतुचर्या व ऋतु हरीतकी के बारे में बताया गया है।
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इस नोट्स के अंतर्गत स्वास्थ्य को परिभाषित किया गया है, जिसमें स्वस्थ पुरुष के लक्षण व आयुर्वेद में वर्णित स्वस्थवृत्त का प्रयोजन, दिनचर्या सदवृत, अचार रसायन का वर्णन किया गया है साथ में व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए आहार कैसा लेना चाहिए, आहार का उद्देश्य, आहार की मात्रा, संतुलित आहार एवं मिताहार का वर्णन किया गया है। स्वास्थ्य एवं व्याधि की अवधारणा व विभिन्न रोगों उच्च रक्तचाप, निम्न रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह, संधिवात, कब्ज, अम्लपित्त, अल्सर, कमर दर्द, गर्दन दर्द, साइटिका, तनाव, चिंता एवं अवसाद आदि रोगों के लक्षण, कारण एवं चिकित्सा का वर्णन भी किया गया है।
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इस नोट्स के अंतर्गत योग का इतिहास ,वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद) प्रस्थानत्रयी, षड्दर्शन, जैन दर्शन - बौद्ध दर्शन में योग ,रामायण-महाभारत में योग आगम और निगम आदि के बारे में चर्चा की गई है। इस नोट्स में तंत्रों में योग, नारद भक्ति सूत्र में योग ,मध्यकाल में योग और भक्ति आंदोलन के बारे में भी बताया गया है। अंत में रामकृष्ण परमहंस, विवेकानंद, श्री अरविंदो, महर्षि रमण, स्वामी दयानंद सरस्वती, कृष्णमाचार्य स्वामी शिवानंद सरस्वती, सत्यानंद सरस्वती, निरजानंद सरस्वती स्वामी राम, रमा और महर्षि महेश योगी की जीवनी पर प्रकाश डाला गया है ।
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इस नोट्स के अंतर्गत आप योग का वास्तविक अर्थ, योग का उद्देश्य, योग का हमारे जीवन में महत्व आदि को जान पाएंगे । योग के प्रकार ज्ञान योग, कर्म योग, भक्ति योग ,अष्टांग योग आदि को गहराई से जान पाएंगे व हमारे चित्त की वृत्तियां कौन-कौन सी हैं, चित्त की वृत्तियों का निरोध किस प्रकार किया जा सकता है उसके साथ साथ चित्त को प्रसन्न रखने के उपायऔर पंच क्लेशों का वर्णन किया गया है।
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इस नोट्स के अंतर्गत आप योग का वास्तविक अर्थ, योग का उद्देश्य, योग का हमारे जीवन में महत्व आदि को जान पाएंगे । योग के प्रकार ज्ञान योग, कर्म योग, भक्ति योग ,अष्टांग योग आदि को गहराई से जान पाएंगे व हमारे चित्त की वृत्तियां कौन-कौन सी हैं, चित्त की वृत्तियों का निरोध किस प्रकार किया जा सकता है उसके साथ साथ चित्त को प्रसन्न रखने के उपायऔर पंच क्लेशों का वर्णन किया गया है।
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इस नोटस् के अंतर्गत अनुसंधान का अर्थ, अनुसंधान की परिभाषा, अनुसंधान के क्षेत्र के बारे में वर्णन किया गया है। इस नोट्स में मुख्यतः शोध के प्रकार, समस्या का चयन, परिकल्पना, प्रतिदर्श चयन की विधियां, अनुसंधान की विधियां, चर, शोध-अभिकल्प, सांख्यिकी का अर्थ, प्रकृति, कार्य एवं महत्व आदि का वर्णन किया गया है।
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इस नोट्स के अंतर्गत व्यावहारिक विज्ञान के क्षेत्र,व्यक्तित्व के सिद्धांत, व्यक्तित्व के निर्धारक,क्रेत्समर,शेल्डन के व्यक्तित्व सिद्धांत, मनोविश्लेषण सिद्धांत, मास्लों का मानवीय सिद्धांत, एडलर का सिद्धांत, युंग का विश्लेषणात्मक सिद्धांत आदि के बारे में बताया गया है। अंत में मनोविज्ञान परीक्षण-उद्देश्य-विशेषताएं , प्रक्षेपी विधियां, बुद्धि के सिद्धांत, चिंतन के प्रकार, समृति के प्रकार,तनाव के लक्षण,कारण,चिंता-व्यसन का योग के द्वारा समाधान बताया गया है।
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इस नोट्स के अंतर्गत काली-मिर्च अजवाइन, मेथी, सौंफ,जीरा, धनिया, इलायची, हल्दी, दालचीनी जैसे मसालों के औषधीय प्रयोग वह औषधीय गुणों से भरपूर सब्जियां पालक,धनिया, बथुआ,अदरक,नींबू मूली,गाजर,शलगम,खीरा,टमाटर आदि हमारे शरीर पर क्या प्रभाव डालती हैं चिकित्सा के उद्देश्य से। अंत में ब्राह्मी, गिलोय,घृतकुमारी,नीम, हरड़, आंवला जैसी औषधीय जड़ी बूटियों के बारे में बताया गया है।
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इस नोट्स के अंतर्गत मनोविज्ञान का अर्थ, परिभाषा एवं अध्ययन की विधियों के साथ-साथ व्यवहारवाद गेस्टाल्टवाद मनोविश्लेषणवाद मानव जीवन का विकास कर्म आदि का वर्णन किया गया है। बाल्यावस्था और किशोरावस्था में मानसिक संवेगात्मक विकास व नैतिक विकास आदि की चर्चा की गई है। व्यक्तित्व के विभिन्न सिद्धांत, चिंतन का विस्तार पूर्वक वर्णन, समायोजन, कुसमयोजन आदि का वर्णन इस नोट्स में है। मानसिक स्वास्थ्य की परिभाषा, महत्व एवं स्वस्थ रहने के उपाय ओर विधियां वर्णित है।
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यह नोट्स हठयोग पर आधारित है, इस नोट्स में अनेकों ग्रंथों का समावेश है। यह नोट्स नेट-जेआरएफ की तैयारी कर रहे हैं, विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिसमें मुख्यतः घेरंड संहिता, हठ प्रदीपिका, हठ रत्नावली, शिव संहिता, वशिष्ठ संहिता, गोरक्ष संहिता, सिद्ध सिद्धांत पद्धति आदि का वर्णन है।
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इस नोट्स के अंतर्गत हठयोग का अर्थ-परिभाषा-उद्देश्य-महत्व, सप्तसाधन,हठसिद्धि के लक्षण, अभ्यास के लिए उचित समय एवं आहार - विहार के बारे में बताया गया है। इस नोट्स में हठ प्रदीपिका के अनुसार षट्कर्म, घेरंड संहिता के अनुसार षट्कर्म को विस्तार से बताया गया है। अंत में प्राणायाम-आसन की परिभाषा- उद्देश्य-महत्व को दर्शाते हुए मुद्रा,नाड़ी, चक्र, कुंडलिनी की परिभाषा, कुंडलिनी जागरण के उपाय बताए गए हैं।